या अली या हुसैन की सदाओं के बीच अकीदतमंदों ने उठाए ताजिए
नसीराबाद,राय बरेली
हजरत इमाम हुसैन की याद में मंगलवार के दिन नगर पंचायत नसीराबाद में गुरखेत से ताजिया के साथ जुलूस निकाला गया। यह कर्बला की लड़ाई में पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन की पुण्यतिथि का प्रतीक है ।
मूल रूप से, ताज़िया इमाम हुसैन के मकबरे की प्रतिकृति है, और इसे कई रूपों और आकारों में बनाया जाता है।
ताज़िया शब्द अरबी शब्द अज़ा से लिया गया है जिसका अर्थ है मृतकों का स्मरण करना।मौलाना ने तकरीर किया कहा कि छह माह के अली असगर को भी यजीदियों ने पानी नही दिया और शहीद कर दिया।
कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन इंसानियत को बचाने के लिए अपने 72 साथियों के साथ शहीद हो गए। तकरीर के बाद ताजिया और अलम के साथ इमाम हुसैन का जुलजनाह बरामद हुआ।
इसके बाद मरसिया पढ़ा। आज शब्बीर पर क्या आलमे तन्हाई है, मरसिया पढ़ते हुए जुलूस अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की।
या हुसैन अलविदा के नारों से पूरा माहौल गमगीन रहा। अजादार ताजिया के साथ मातम करते हुए मोहल्ला कायस्थाना,डेला,प्राइमरी स्कूल,जानी गड़ही, हाता, मोमिन पुरा, हसन मियां की कोठी,मंडल,हाशिम कुआं, मिलकियाना,बंगला,अंसारी मोहल्ला होते हुए कर्बला पहुंचकर ताजिया दफन किया गया।
रास्ते में जुलूस में थानाध्यक्ष दयानंद तिवारी अपने थाना स्टाफ के साथ मुस्तैद देखे गये।यही नही पुलिस अधीक्षक रायबरेली के निर्देश पर पूरे जुलूस की निगरानी ड्रोन कैमरे से करायी जा रही थी।हर चौराहों पर जगह जगह पुलिस फोर्स मुस्तैद दिखी।
उमा शंकर चौरशिया
संवाददाता तहसील सलोन
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