एनएचएम रायबरेली भ्रष्टाचार का अड्डा बना!
बीपीएम प्रदीप पाण्डेय पर फर्जी फर्मों से सरकारी धन की लूट का सनसनीखेज आरोप
रायबरेली।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) रायबरेली में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं, बल्कि व्यवस्था बन चुका है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डीह में तैनात ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक (BPM) प्रदीप कुमार पाण्डेय पर पद का खुला दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन की संगठित लूट, फर्जीवाड़ा और नियमों की हत्या के अत्यंत गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसने पूरे विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
दस्तावेज़ों के अनुसार आरोप है कि श्री पाण्डेय ने सेवा में रहते हुए अपनी पत्नी व रिश्तेदारों के नाम फर्जी फर्में और GST पंजीकरण कराकर स्वास्थ्य विभाग से भुगतान प्राप्त किया। यह कृत्य न केवल सेवा नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि सरकारी पद पर बैठकर निजी व्यापार के जरिए कमाई करने का आपराधिक प्रयास भी माना जा रहा है।
इतना ही नहीं, श्री पाण्डेय द्वारा LIC अभिकर्ता के रूप में कार्य करना, विरोध होने पर अभिकर्ता कोड पत्नी के नाम स्थानांतरित करना, तथा पद की आड़ में निजी हित साधना यह साबित करता है कि नियमों को जानबूझकर रौंदा गया। यह पूरा मामला हितों के टकराव और नैतिक पतन का जीता-जागता उदाहरण है।
आरोप यह भी है कि सेवा प्रदाता एजेंसी से हुई नियुक्ति को पिछले दरवाज़े से नियम विरुद्ध रूप में स्थानान्तरण कर जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित कराया गया, जिसमें आरक्षण नियमों और चयन प्रक्रिया को ताक पर रखा गया। भ्रष्टाचार से अर्जित धन से वाहन व संपत्तियाँ खरीदकर काले धन को सफेद करने की आशंका ने मामले को और भी विस्फोटक बना दिया है।
सबसे शर्मनाक तथ्य यह है कि बार-बार शिकायतों और दस्तावेज़ी साक्ष्यों के बावजूद विभाग मौन साधे बैठा है। यह चुप्पी केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संरक्षण और मिलीभगत की बू दे रही है। सवाल उठता है कि क्या एनएचएम में भ्रष्टाचारियों को खुली छूट दे दी गई है?
जनहित में मांग की जाती है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जाँच कराकर दोषी अधिकारियों पर तत्काल निलंबन, एफआईआर और कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, अन्यथा यह माना जाएगा कि स्वास्थ्य विभाग स्वयं भ्रष्टाचार का संरक्षक बन चुका है।
मंडल ब्यूरो चीफ पवन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
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