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Home / उत्तर प्रदेश / टेढ़े पैरों से चलना था मुश्किल, आज अपने पैरों पर दौड़ रहा शिवाकान्त

टेढ़े पैरों से चलना था मुश्किल, आज अपने पैरों पर दौड़ रहा शिवाकान्त


टेढ़े पैरों से चलना था मुश्किल, आज अपने पैरों पर दौड़ रहा शिवाकान्त

टेढ़े पैरों से चलना था मुश्किल, आज अपने पैरों पर दौड़ रहा शिवाकान्त

रायबरेली।

हरचंदपुर ब्लॉक के गुनावर निवासी संतोष गुप्ता की खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं क्योंकि उनका 15 माह का बच्चा शिवाकान्त जो जन्मजात क्लब फुट की बीमारी (ऐसी स्थिति जिसमें बच्चों के पैर अंदर की तरफ मुड़े होते हैं) से पीड़ित था अब वह बिल्कुल ठीक है। संतोष बताते हैं कि शिवाकान्त के जन्म के बाद हम जन्म की खुशी भी नहीं मना पाए क्योंकि हमने देखा कि बच्चे का दायाँ पैर अंदर की तरफ मुड़ा हुआ था। यह हमारे लिए बहुत परेशान होने वाली बात थी क्योंकि हमने कभी ऐसा देखा नहीं था और न ही सुना था लेकिन डाक्टर और स्टाफ नर्स ने बताया कि अगर इसका सही समय से इलाज कराएंगे तो ठीक हो जाएगा। जन्म के बाद ही सीएचसी हरचंदपुर पर तैनात डॉ पूनम तथा डा. हीरालाल ने बच्चे की जांच की और कहा कि बच्चा पूरी तरह से ठीक हो जाएगा और एक पैसा भी खर्च नहीं होगा। हमने डाक्टर साहब की बात को माना और जैसा उन्होंने कहा वैसा ही किया। बच्चे का लगभग एक साल तक इलाज चला और अभी भी जांच कराने के लिए डाक्टर के पास जाना पड़ता है लेकिन आज मेरा बच्चा अपने पैरों पर दौड़ रहा है और अच्छी बात यह है कि बच्चे के इलाज में मेरा रत्ती भर भी पैसा नहीं खर्च हुआ।
नोडल अधिकारी डा. अशोक रावत बताते हैं कि क्लब फुट जन्मजात बीमारी है। यह क्लब फुट एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चों के पैर अंदर की तरफ मुड़े होते हैं और इस वजह से बच्चें सामान्य तरह से चलने-फिरने में अक्षम होते हैं। क्लब फुट में मांसपेशियों को टेंडॉन से जोड़ने वाले ऊतक सामान्य से छोटे होते हैं जिसके कारण नवजात का एक या दोनों पैर अंदर की ओर मुड़े हुए होते हैं। जिला अस्पताल में अनुष्का फाउंडेशन क्लीनिक संचालित है यह विभाग की सहयोगी संस्था है यह क्लब फुट से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क इलाज करती है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ऐसे बच्चों की स्क्रीनिंग कर इस क्लीनिक पर लाती है जहां बच्चों का इलाज किया जाता है। इसके साथ ही ऐसे बच्चों को पाँच साल तक की आयु तक स्पेशल जूते पहनने होते हैं जब तक पैर पूरी तरह से ठीक न हो जाए। वह भी क्लिनिक द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।
सीचसी हरचंदपुर में तैनात आबीएसके के चिकित्सक डा. पूनम और डा. हीरालाल बताते हैं कि शिवाकान्त को जन्म के 18 वें दिन बाद क्लीनिक पर लाया गया। तब से अब तक बच्चे का एक छोटा ऑपरेशन हो चुका है और छह बार प्लास्टर चढ़ चुका है। अब वह ठीक है। उसको क्लीनिक द्वारा स्पेशल जूते निशुल्क उपलब्ध कराये गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वीरेंद्र सिंह बताते हैं कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एक ऐसी ही पहल है जिसका उद्देश्य 0-19 वर्ष के बच्चों में चार प्रकार की विसंगतीयों की जांच करना है। इनको फोर डी भी कहते हैं – डिफ़ेक्ट एट बर्थ, डेफिशिएन्सी, डिजीज, डेव्लपमेंट डिलेज इंक्लुडिंग डिसेबिलिटी यानि किसी भी प्रकार का विकार, बीमारी, कमी और विकलांगता । इन कमियों से प्रभवित बच्चों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम निःशुल्क सर्जरी सहित प्रभावी उपचार प्रदान कराता है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है कि जन्म से 19 वर्ष तक की आयु का कोई भी बच्चा स्वास्थ्य से वंचित न रहे। अभी यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जा रहा है।
अनुष्का फाउंडेशन के डिवीजनल अधिशासी अधिकारी दिलीप धर दुबे ने बताया कि वर्तमान में क्लब फुट से पीड़ित 148 बच्चों का क्लीनिक में इलाज चल रहा है।

रायबरेली।

हरचंदपुर ब्लॉक के गुनावर निवासी संतोष गुप्ता की खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं क्योंकि उनका 15 माह का बच्चा शिवाकान्त जो जन्मजात क्लब फुट की बीमारी (ऐसी स्थिति जिसमें बच्चों के पैर अंदर की तरफ मुड़े होते हैं) से पीड़ित था

अब वह बिल्कुल ठीक है। संतोष बताते हैं कि शिवाकान्त के जन्म के बाद हम जन्म की खुशी भी नहीं मना पाए क्योंकि हमने देखा कि बच्चे का दायाँ पैर अंदर की तरफ मुड़ा हुआ था।

यह हमारे लिए बहुत परेशान होने वाली बात थी क्योंकि हमने कभी ऐसा देखा नहीं था और न ही सुना था लेकिन डाक्टर और स्टाफ नर्स ने बताया कि अगर इसका सही समय से इलाज कराएंगे

तो ठीक हो जाएगा। जन्म के बाद ही सीएचसी हरचंदपुर पर तैनात डॉ पूनम तथा डा. हीरालाल ने बच्चे की जांच की और कहा कि बच्चा पूरी तरह से ठीक हो जाएगा और एक पैसा भी खर्च नहीं होगा।

हमने डाक्टर साहब की बात को माना और जैसा उन्होंने कहा वैसा ही किया। बच्चे का लगभग एक साल तक इलाज चला और अभी भी जांच कराने के लिए डाक्टर के पास जाना पड़ता है लेकिन आज मेरा बच्चा अपने पैरों पर दौड़ रहा है और अच्छी बात यह है कि बच्चे के इलाज में मेरा रत्ती भर भी पैसा नहीं खर्च हुआ।

नोडल अधिकारी डा. अशोक रावत बताते हैं कि क्लब फुट जन्मजात बीमारी है। यह क्लब फुट एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चों के पैर अंदर की तरफ मुड़े होते हैं और इस वजह से बच्चें सामान्य तरह से चलने-फिरने में अक्षम होते हैं।

क्लब फुट में मांसपेशियों को टेंडॉन से जोड़ने वाले ऊतक सामान्य से छोटे होते हैं जिसके कारण नवजात का एक या दोनों पैर अंदर की ओर मुड़े हुए होते हैं। जिला अस्पताल में अनुष्का फाउंडेशन क्लीनिक संचालित है

यह विभाग की सहयोगी संस्था है यह क्लब फुट से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क इलाज करती है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ऐसे बच्चों की स्क्रीनिंग कर इस क्लीनिक पर लाती है जहां बच्चों का इलाज किया जाता है। इसके साथ ही ऐसे बच्चों को पाँच साल तक की आयु तक स्पेशल जूते पहनने होते हैं जब तक पैर पूरी तरह से ठीक न हो जाए। वह भी क्लिनिक द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

सीचसी हरचंदपुर में तैनात आबीएसके के चिकित्सक डा. पूनम और डा. हीरालाल बताते हैं कि शिवाकान्त को जन्म के 18 वें दिन बाद क्लीनिक पर लाया गया। तब से अब तक बच्चे का एक छोटा ऑपरेशन हो चुका है और छह बार प्लास्टर चढ़ चुका है। अब वह ठीक है। उसको क्लीनिक द्वारा स्पेशल जूते निशुल्क उपलब्ध कराये गए हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वीरेंद्र सिंह बताते हैं कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एक ऐसी ही पहल है जिसका उद्देश्य 0-19 वर्ष के बच्चों में चार प्रकार की विसंगतीयों की जांच करना है। इनको फोर डी भी कहते हैं – डिफ़ेक्ट एट बर्थ, डेफिशिएन्सी, डिजीज, डेव्लपमेंट डिलेज इंक्लुडिंग डिसेबिलिटी यानि किसी भी प्रकार का विकार, बीमारी, कमी और विकलांगता । इन कमियों से प्रभवित बच्चों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम निःशुल्क सर्जरी सहित प्रभावी उपचार प्रदान कराता है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है कि जन्म से 19 वर्ष तक की आयु का कोई भी बच्चा स्वास्थ्य से वंचित न रहे। अभी यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जा रहा है।

अनुष्का फाउंडेशन के डिवीजनल अधिशासी अधिकारी दिलीप धर दुबे ने बताया कि वर्तमान में क्लब फुट से पीड़ित 148 बच्चों का क्लीनिक में इलाज चल रहा है।

विकास श्रीवास्तव की रिर्पोट 

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