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मुकेश आनन्द जी के कथा में भक्ति और आध्यत्म का अद्भुत संगम देखने को मिला


*मुकेश आनन्द जी के कथा में भक्ति और आध्यत्म का अद्भुत संगम देखने को मिला*

नसीराबाद,रायबरेली। पूरे सत्यनारायण का पुरवा मजरे बिरनावा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन विद्वान कथाव्यास मुकेश आनन्द जी महाराज ने भागवत कथा के महात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भागवत कथा भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं पर आधारित है इसका अर्थ है भक्ति,ज्ञान,वैराग्य और तारण। इसे श्रीमद्भागवत महापुराण भी कहा जाता है। इसके श्रवण मात्र से मानव का आध्यात्मिक विकास होता है और भगवान के प्रति श्रद्धा भक्ति गहरी होती है। इस अमरकथा को सुनने से प्राणी को मृत्यु भय नहीं सताता।

पूज्य कथाव्यास ने पांचवे दिन की कथा में मानव जीवन के रहन सहन के साथ धुंधकारी के प्रसंग का रोचक वर्णन करते हुए बताया कि तुंगभद्रा नदी के किनारे एक गांव में आत्मदेव नामक एक ब्राम्हण और उसकी पत्नी धुंधली रहती थी।आत्म देव तो सज्जन था। किन्तु उसकी पत्नी दुष्टा थी। जिसका प्रभाव उसके पुत्र पर पड़ा। आचार्य ने नरसिंह भगवान, शुकदेव मुनि,परीक्षित महाराज आदि के बारे में विस्तार से चर्चा की। कथा के अंत में यजमान जगदम्बा प्रसाद तिवारी व जागेश्वरी ने आरती की और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। महेश नारायण तिवारी,जितेंद्र तिवारी,रवि तिवारी सहित सैकड़ों भक्तों ने कथा सुनकर पुण्यलाभ प्राप्त किया।

आनंद मोहित मिश्रा की रिपोर्ट 

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