‘कविराग’ ने भरी हँसी, श्रृंगार और संवेदना की रंगीन उड़ान
बहादुरपुर,जायस
राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी), जायस के वार्षिक सामाजिक उत्सव ‘सौहार्द्य–2025’ के तहत 14 नवंबर की रात को आयोजित हुआ ‘कविराग’, जिसने इस सांस्कृतिक संध्या को हँसी, श्रृंगार और संवेदना के रंगों से भर दिया।
‘कविराग’ में देशभर के विख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं और प्रभावशाली मंचीय प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया।
मुंबई से आए कवि दुर्गेश दुबे ने काशी–मुंबई की सांस्कृतिक झलक लिए प्रेम और श्रृंगार रस की रचनाओं से दर्शकों का दिल जीत लिया। “जो कहना था वो तुलसी कह गए थे, कि हम सब सिर्फ चरबा कर रहे हैं।”
इस पंक्ति पर सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा।
चंदौसी के प्रसिद्ध शायर चराग शर्मा, जो युवाओं में विशेष लोकप्रिय हैं, ने अपने सशक्त और ऊर्जावान अंदाज़ से मंच को नई ऊर्जा दी। “तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है, मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है।”
उनकी इन पंक्तियों ने युवाओं के मन में गहरी छाप छोड़ी।
अहमदाबाद की सोशल मीडिया सनसनी आयुषी राखेचा ने श्रृंगार और हल्के हास्य का अनोखा मिश्रण प्रस्तुत कर कार्यक्रम में नई रोचकता और ताजगी घोल दी। “वो सुन रहा था मेरी धड़कनों की थाप को,
मुश्किल से रोक पाई मैं भी अपने आप को।” उनकी कोमल अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
वहीं ‘स्माइल मैन’ के नाम से प्रसिद्ध सर्वेश अवस्थाना ने अपने प्रखर हास्य–व्यंग्य से पूरे परिसर को ठहाकों से गूंजा दिया। “पिता जी को मेरी शादी का ख्याल आया, तो विज्ञापन में उम्र 82 क्यों छपवाया?”
इस पंक्ति पर दर्शकों की हँसी देर तक थमी नहीं।
कार्यक्रम में कवियों ने प्रेम, व्यंग्य, हास्य और जीवन के विविध रंगों को मंच पर कुशलता से पिरोया। यह आयोजन न केवल हास्य और श्रृंगार का संगम रहा, बल्कि युवाओं को भारतीय काव्य–परंपरा की गहराई से जोड़ने का एक सुंदर प्रयास भी सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम के आयोजक थे डीन (छात्र कल्याण) प्रो. देबाशीष पांडा एवं फैकल्टी संयोजक डॉ. अरविन्द सिंह ने पूरे आयोजन का सफल संचालन और समन्वय किया। छात्र संयोजकों में हर्षित पांडे, कौशल शर्मा, ओंकार, कृतिका, सामर्थ्य तथा वैभव रघुवंशी सहित अनेक विद्यार्थियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

इससे पूर्व सांस्कृतिक महोत्सव ‘कलतरंग’ का भव्य उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ फ़ेम डॉ. अनुराधा सिंह मुख्य अतिथि रहीं। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा -“धैर्य और दृढ़ता मेरी सफलता की कुंजी रहे हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदलने की कला ही जीवन में वास्तविक सफलता की पहचान है। संस्थान के निदेशक प्रो. हरीश हिरानी ने अपने संबोधन में कहा कि आरजीआईपीटी न केवल तकनीकी शिक्षा में, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने छात्रों से कहा कि ऐसे आयोजन उनके व्यक्तित्व में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और नेतृत्व के गुणों का विकास करते हैं।
ऊर्जा संगम–2025 के अंतर्गत आयोजित ‘सौहार्द्य’, ‘कलतरंग’ और ‘कविराग’ जैसे कार्यक्रमों ने आरजीआईपीटी के सांस्कृतिक उत्सवों को नई ऊँचाई प्रदान की तथा कला, साहित्य और मानवीय संवेदना का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
मंडल ब्यूरो चीफ पवन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
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