सच्ची श्रद्धा से मिलती है भगवान की कृपा : दिलीप तिवारी कथावाचक
ऊंचाहार, रायबरेली।
नगर के बिजलीघर के पास स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास दिलीप तिवारी ने नारद-भक्ति संवाद एवं धुंधकारी प्रसंग का भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन किया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे तथा पूरा पंडाल भगवान के जयघोष से गुंजायमान हो गया।
कथा के दौरान कथावाचक ने बताया कि तुंगभद्रा नदी के किनारे आत्मदेव नामक एक विद्वान ब्राह्मण अपनी पत्नी धुंधुली के साथ रहते थे। संतान न होने के कारण वे अत्यंत दुखी रहते थे। एक संत की कृपा से उन्हें गोकर्ण एवं धुंधकारी नाम के दो पुत्र प्राप्त हुए। गोकर्ण बचपन से ही ज्ञानी, धार्मिक एवं विरक्त स्वभाव के थे, जबकि धुंधकारी कुसंगति में पड़कर दुराचार, चोरी एवं व्यभिचार में लिप्त हो गया। वह अपने माता-पिता के साथ भी दुर्व्यवहार करता था। अंततः दुष्कर्मों के कारण उसकी अकाल मृत्यु हुई और उसे प्रेत योनि प्राप्त हुई।
कथावाचक ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार ही अगली योनि प्राप्त होती है, इसलिए पाप कर्मों से बचते हुए भगवान की भक्ति, सत्संग एवं सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा एवं अटूट विश्वास से भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। प्रह्लाद जी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान के प्रति अडिग विश्वास रखने पर भगवान स्वयं भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं।
आयोजित कथा में मुख्य यजमान अभिलाष चंद्र कौशल ने कहा कि “श्रीमद्भागवत कथा समाज में धर्म, संस्कार एवं आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करती है। कथा का श्रवण व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है तथा समाज को सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”
इस अवसर पर राजा जितेंद्र सिंह अरखा, गिरिजेश पासी, राकेश चंद्र उपाध्याय, शिवभवन शुक्ला, लालचंद्र कौशल, मनीष मिश्रा, गुंजन तिवारी, डॉ. पी. कुमार एवं सुधीर पांडे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मंडल ब्यूरो चीफ पवन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
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