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नीम का पेड़ गिरने से 50 वर्षीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत, गांव में छाया मातम


नीम का पेड़ गिरने से 50 वर्षीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत, गांव में छाया मातम

——– रायबरेली।

रायबरेली जनपद के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले किशनपुर मजरे जोहवा शर्की गांव में रविवार को एक हृदय विदारक हादसा सामने आया, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। एक विशाल और पुराना नीम का पेड़ अचानक जड़ से उखड़कर गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर 50 वर्षीय व्यक्ति की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान किशनपुर निवासी नेपाल कुशवाहा (उम्र लगभग 50 वर्ष) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि रविवार सुबह वह अपने घर के पास ही दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। वह अपने पशुओं को खोल रहे थे, तभी अचानक यह हादसा हो गया। जिस स्थान पर वह खड़े थे, उसके ठीक समीप एक पुराना और विशाल नीम का पेड़ था, जो वर्षों से वहीं खड़ा था। ग्रामीणों के अनुसार, पेड़ काफी पुराना और कमजोर हो चुका था, लेकिन किसी ने यह अंदाजा नहीं लगाया था कि वह इस तरह अचानक गिर पड़ेगा।

*अचानक हुआ हादसा, संभलने का नहीं मिला मौका*—

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नेपाल कुशवाहा जैसे ही अपने पशुओं को खोल रहे थे, तभी अचानक तेज आवाज के साथ नीम का पेड़ जड़ समेत उखड़कर गिर पड़ा। पेड़ का एक बड़ा हिस्सा सीधे उनके ऊपर आ गिरा, जिससे वह पेड़ और मकान के मलबे के नीचे दब गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि उन्हें संभलने या वहां से हटने का कोई मौका ही नहीं मिला। पेड़ गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर दौड़ पड़े। जब ग्रामीणों ने देखा कि नेपाल कुशवाहा पेड़ के नीचे दबे हुए हैं, तो तुरंत राहत कार्य शुरू किया गया। ग्रामीणों ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद पेड़ और मलबे को हटाया और उन्हें बाहर निकाला।

*अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गई सांसें* ———

ग्रामीणों द्वारा आनन-फानन में नेपाल कुशवाहा को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के बाद उनके परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मृतक के परिवार में पत्नी, बच्चे और अन्य सदस्य हैं, जो इस घटना से गहरे सदमे में हैं। बताया जा रहा है कि नेपाल कुशवाहा अपने परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे, और उनकी अचानक मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

*गांव में पसरा सन्नाटा, हर आंख नम* ———

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। हर कोई इस हादसे से स्तब्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि नेपाल कुशवाहा एक सरल और मिलनसार व्यक्ति थे, जो सभी के साथ अच्छे संबंध रखते थे। उनकी असमय मौत से गांव ने एक अच्छा इंसान खो दिया है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस तरह के पुराने और जर्जर पेड़ों की समय-समय पर जांच और कटाई होनी चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। यदि समय रहते इस पेड़ को हटा दिया गया होता, तो शायद आज यह हादसा न होता।

*पुलिस ने मौके पर पहुंचकर की जांच* ———–

घटना की सूचना मिलते ही हरचंदपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह एक प्राकृतिक हादसा प्रतीत हो रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस ने परिजनों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली और उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि गांव में मौजूद अन्य पुराने और खतरनाक पेड़ों की पहचान कर उन्हें हटाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

*ऐसी घटनाओं से सबक लेने की जरूरत*———-

यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है। अक्सर गांवों और कस्बों में पुराने और जर्जर पेड़ वर्षों तक खड़े रहते हैं, जिनकी ओर कोई ध्यान नहीं देता। लेकिन समय आने पर यही पेड़ जानलेवा साबित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात और आंधी के मौसम में ऐसे पेड़ों के गिरने की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। इसलिए स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायतों को चाहिए कि वे समय-समय पर ऐसे पेड़ों का सर्वेक्षण कर उन्हें हटाने की कार्रवाई करें।

*परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़* ——-

नेपाल कुशवाहा की मौत ने उनके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। परिजन अभी भी इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि उनका अपना अब इस दुनिया में नहीं रहा। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग लगातार परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन इस दुख की घड़ी में कोई भी शब्द उनके दर्द को कम नहीं कर पा रहा है। हरचंदपुर थाना क्षेत्र के किशनपुर गांव में हुआ यह हादसा एक गंभीर चेतावनी है कि हमें प्राकृतिक और संरचनात्मक जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक छोटी सी लापरवाही या अनदेखी किसी की जान ले सकती है। नेपाल कुशवाहा की मौत ने यह साबित कर दिया कि सतर्कता और समय पर कार्रवाई कितनी जरूरी है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस घटना से कितना सबक लेता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, पूरा गांव नेपाल कुशवाहा को नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहा है और उनके परिवार के साथ इस दुख की घड़ी में हर परिवार खड़ा है।

मंडल ब्यूरो चीफ पवन श्रीवास्तव की रिपोर्ट 

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