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आरजीआईपीटी में उद्योग, शिक्षाविद और नीतिनिर्माताओं का जुटान — पेट्रोलियम, डीकार्बोनाइजेशन एवं हाइड्रोजन ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर मंथन


आरजीआईपीटी में उद्योग, शिक्षाविद और नीतिनिर्माताओं का जुटान — पेट्रोलियम, डीकार्बोनाइजेशन एवं हाइड्रोजन ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर मंथन

7 नवम्बर 2025:

राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान, जायस में आज तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पेट्रोलियम, हाइड्रोजन एंड डीकार्बोनाइजेशन (आईसीपीएचडी-2025) का शुभारंभ हुआ।

इस सम्मेलन में उद्योग, शिक्षाविद और नीतिनिर्माताओं ने एक साझा मंच पर एकत्र होकर पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में सहयोग और नवाचार की संभावनाओं पर चर्चा की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। प्रो. सतीश सिन्हा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. तुषार शर्मा ने सम्मेलन की रूपरेखा और आगामी सत्रों की जानकारी दी।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. कौस्तव नाग, अपर निदेशक (अन्वेषण) डीजीएच इंडिया, तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. शालिवाहन श्रीवास्तव, निदेशक आईआईपीई विशाखापट्टनम उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. हरीश हिरानी, निदेशक आरजीआईपीटी ने की।

प्रो. हरीश हिरानी ने कहा कि डीकार्बोनाइजेशन और हाइड्रोजन ऊर्जा भविष्य की दिशा तय करने वाले क्षेत्र हैं, और यह सम्मेलन उद्योग एवं अकादमिक जगत को जोड़ने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है।

 डॉ. कौस्तव नाग ने अपने संबोधन में कहा कि भारत एक ऊर्जा-अभावग्रस्त राष्ट्र है जो आयात पर अत्यधिक निर्भर है। हाइड्रोकार्बन वर्ष 2047 तक भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार बने रहेंगे। देश के पास लगभग 1,140 गीगाटन की कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) क्षमता है और नेचुरल हाइड्रोजन तथा गैस हाइड्रेट पर शोध को प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रो. शालिवाहन श्रीवास्तव ने अपने व्याख्यान जियोफिजिकल एंड पेट्रोफिजिकल सिग्नेचर्स ऑफ सेरपेंटाइजेशन में बताया कि भारत में नेचुरल हाइड्रोजन ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं, जिनकी लागत मात्र 1 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम तक हो सकती है। उन्होंने ‘हाइड्रोजन लिटरेसी’ की आवश्यकता पर बल दिया और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। 

कार्यक्रम का समापन प्रो. आलोक कुमार सिंह द्वारा दिए गए वोट ऑफ थैंक्स से हुआ, जिसमें उन्होंने सभी विशिष्ट अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

गेल (इंडिया) लिमिटेड की वीडियो प्रस्तुति वसुधैव कुटुम्बकम् थीम पर आधारित रही, जिसमें उन्होंने 2035 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रो. एम. राजीव मनोहर, मानद निदेशक उन्नत अध्ययन केंद्र ओएनजीसी ने अपने व्याख्यान लिक्विड क्रिस्टल्स एंड इट्स एप्लिकेशंस में बताया कि लिक्विड क्रिस्टल प्रौद्योगिकी अब केवल डिस्प्ले तक सीमित नहीं रही। उनके प्रयोगशाला द्वारा विकसित एक्टिव लिक्विड क्रिस्टल ग्रेटिंग और मल्टीफोकल लिक्विड क्रिस्टल लेंस तकनीकें ऊर्जा दक्षता और प्रदर्शन में नई दिशा प्रदान कर रही हैं।

डॉ. सत्याम प्रियदर्शी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी रीइग्नाइट फ्यूचर (यूएसए) ने कहा कि विश्व स्तर पर 40 प्रतिशत डेटा अस्वच्छ है और अरबों डॉलर की जानकारी अप्रयुक्त पड़ी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्लाउड टेक्नोलॉजी के प्रयोग से ड्रिलिंग, कॉन्ट्रैक्ट एनालिसिस और सिस्मिक डेटा इंटरप्रिटेशन में क्रांतिकारी सुधार संभव है।

पहले दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में इंडस्ट्री और अकादमिक विशेषज्ञों ने अपने कीनोट लेक्चर्स प्रस्तुत किए। प्रो वीसी श्रीवास्तव, आईआईटी रुड़की ने डी-सल्फराइजेशन ऑफ गैस ऑयल यूजिंग एक्सट्रैक्टिव सिस्टम्स विषय पर व्याख्यान दिया और बताया कि नई एक्सट्रैक्टिव डी-सल्फराइजेशन तकनीकें ईंधन की गुणवत्ता सुधारते हुए सल्फर उत्सर्जन में कमी लाती हैं। नवीन कौल, महाप्रबंधक बीएचईएल जगदीशपुर ने रिलेवेंस ऑफ इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ इन सस्टेनेबिलिटी विषय पर चर्चा की और इंडस्ट्रियल डिजिटलाइजेशन, एनर्जी एफिशिएंसी एवं ग्रीन टेक्नोलॉजी के महत्त्व को रेखांकित किया। विनय बाबू, लीड जियोसाइंटिस्ट बेकर ह्यूजेस ने कन्वर्जेन्स – पेट्रोलियम, हाइड्रोजन एंड डीकार्बोनाइजेशन विषय पर व्याख्यान दिया और बताया कि पेट्रोलियम ऑपरेशन्स को हाइड्रोजन प्रोडक्शन, कार्बन कैप्चर और रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स से जोड़ना ही सस्टेनेबल एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा है।

 

अरुण सिंघल, संस्थापक एवं मुख्य संपादक डीईडब्ल्यू जर्नल ऊर्जा के संचालन में परिवर्तन की दिशा में एकीकृत दृष्टिकोण पर एक उच्च-स्तरीय पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया जिसमें प्रो. हरीश हिरानी, डॉ. कौस्तव नाग, प्रो. शालिवाहन श्रीवास्तव, नवीन कौल, विनय बाबू आदि ने पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, हाइड्रोजन वैल्यू चेन और डीकार्बोनाइजेशन स्ट्रैटेजीज पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इंडस्ट्री-एकेडेमिया-पॉलिसी कोलैबोरेशन ही सस्टेनेबल एनर्जी ट्रांजिशन का आधार है।

 

दिवस-1 के अंत में छात्रों द्वारा आयोजित पोस्टर प्रेजेंटेशन्स और रिसर्च शोकेसेज़ में पेट्रोलियम प्रोडक्शन ऑपरेशन्स, एनर्जी इंटीग्रेशन एंड ट्रांजिशन एवं पेट्रोलियम जियोसाइंस विषयों पर प्रस्तुतियाँ हुईं | इन प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता, नवाचार भावना और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के प्रमुख संस्थान और कंपनियाँ 

डीएसटी-बीएसआईपी लखनऊ, आईआईटी मुंबई, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी-आईएसएम धनबाद, आईआईटी मद्रास, आईआईपीई विशाखापट्टनम, पीडीईयू गांधीनगर, एमआईटी-डब्ल्यूपीयू पुणे, प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी बेंगलुरु, ओएनजीसी, गेल (इंडिया) लिमिटेड, एसएनएफ फ्लोपैम इंडिया प्रा. लि. और सन पेट्रोकेमिकल्स प्रा. लि. से प्रतिनिधियों ने भाग ले रहे हैं ।

मंडल ब्यूरो चीफ पवन श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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